Sep 24, 2011

चर्बी : उर्जा का वैकल्पिक स्रोत

Fats : Alternative Source of Energy :

मोटापा अब अभिशाप नहीं ! स्वास्थ, खेल, श्रम और बिजली मंत्रालयों के मिलेजुले प्रयासों  फलस्वरूप अब शहरी मोटे लोगो के लिए एक अच्छी खबर है | सनद रहे पिछली जनगणना के मुताबिक देश में शहरों में मोटे लोगो की संख्या में लगातार वृद्धी हुई है और इसके आगे भी यूँ ही बढने के आसार हैं ! इसका मुख्य कारण निज जीवन में ज्यादा मशीनी उपभोग , दिनरात  टेलीविजन पे सीरियल्स देखना जो महिलाओं को "बड़े अच्छे लगते हैं" , सुबह शाम फास्ट फ़ूड का सेवन और शारीरिक श्रम से दूर होना हैं | जहाँ कभी लोग सुबह मीलो मार्निंग वाक या साईकिल चलाया करते थे वहीँ लोग आज अपने मुहल्ले के पार्क तक बाईक या कार से जाते हैं ! जो महिलाये कभी घर का झाड़ू पोछा ,साफ़ सफाई , खाना बनाना , कपडे धोना , इत्यादि खुद ही किया करती थी वहीँ आज इनकी वाशिंग मशीन और वक्युम क्लीनर इस्तेमाल करने के लिए भी मेड होती हैं ! जो पुरुष कभी छिप-छिपा कर घर इत्यादि का काम किया कर लिया करते थे वो आज इन्टरनेट ,फेसबुक ट्विटर पर खुल कर टाइम ख़राब करते हैं ! चार मंजिला मकानों में बिना लिफ्ट के जीना किसी सामाजिक शर्म से कम नहीं , किराने वाले आज कल  50 रुपए से कम का सामान भी घर पे फ्री होम डिलेवरी करते हैं जिससे लोगो का अपने पैरो से चलना फिरना और भी कम हो  गया है ! जी हाँ  गये वो दिन जब हमारी किताबो में इश्वर चन्द्र विद्यासागर लिखित "अपना कम स्वयम करें " जैसे पाठ हुवे थे |

M I T ( मुरैना इंस्टिट्यूट आफ टेकनोलोजी ) और सरकार की एक संयुक्त शोधकर्ता टीम ने पाया की मोटे और निहायती  आलसी लोग इक्कीसवी सदी के असली उर्जा स्रोत होंगे ! इसका विचार एक युवा को उस समय किल्क हुआ जब उसने अपने आफिस के ज़िम में एक मोटे व्यक्ति को ट्रेड मिल पर चलते हुवे देखा , अचानक बिजली गुल हो जाने पर वो बिजली चालित ट्रेड मिल की बेल्ट रुक गयी और मोटा सोना बेल्ट पहने व्यक्ति गिल्ट से भरा यूँ ही रुक गया  ! बस यही  क्षण उस युवा द्रष्टा (वैज्ञानिक) के यूरेका पल थे !  आँखों ही आँखों में युवा ने मोटे व्यक्ति को धन्यवाद किया और सांतवना देकर वहां से सीधे मेरठ की  बस पकड़ कर निकल लिया और वहां जाकर अपना पेपर प्रस्तुत किया !

इसके बाद शोधकर्ताओं ने  लगभग पॉँच हज़ार से ज़्यादा मोटे लोगो पर शोध में पाया कि लोगो में टनों चर्बी जमी है जो उर्जा का ही एक अन्य ठोस रूप है , जिसको शोधित कर विद्युत उर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है ! उन्होने prototype के लिए  ट्रेड मिल और  ज़िम की स्थिर साईकिल (stationary cycles) को चुना , इन पर थोड़े बदलाव के बाद मोटर की जगह डायनामो लगा दिए गए ,अब चलाये जाने पर इनसे विद्युत उत्पादन निश्चित ही संभव था ! अनुमान से अधिक उत्पादन होने पर शोधकर्ताओं में उल्लास था , आनन् फानन में सरकार ने सभी निजी और सरकारी स्पोर्ट्स कोम्प्लेक्सेस , जिमो में इसी तरेह के बदलावों की मंजूरी दे दी है  | सिर्फ बडे शहरों के मोटे लोगो से सरकार हजारो मेगा वाट बिजली उत्पादन का अनुमान लगा रही है ! मोटे लोगो द्वारा ट्रेड मिल , साइकिलिंग और जम्पिंग से बिजली उत्पादन को मानवाधिकार आयोग की हरी झंडी मिलना लगभग तय है | स्वास्थ्य और श्रम विभाग पहले ही उत्साहित हैं !  जहाँ आज चारो तरफ परमाणु सयंत्रो(Nuclear plants) का घोर विरोध हो रहा है इस प्रकार के छोटे Fatty(चर्बी) उर्जा संयंत्र  इस दिशा में काफी किफायती साबित होंगे  ऐसा मानना है सबका |  

सरकार संसद के उमसकालीन सत्र में इसी सम्बंधित एक बिल पर विचार कर रही है जिसमे इस प्रकार उत्पादित बिजली के दाम , जिमो को उपकरणों की खरीद फरोख्त में सब्सिडी , प्रति यूनिट बिजली उत्पादन में मोटे लोगो की कमीशन , पतले हो जाने के बाद राष्ट्र सेवा मेडल , मोटे आलसी  स्वयंसेवक  छात्रों को स्कालरशिप , मोटे  सरकारी बाबुओं  और मोटी तोंद वाले पुलिस वालो को पतला होने पर प्रोमोशन गारंटी , जातिय आरक्षण व् अन्य लाभ !   बिलकुल सही समझा , अगर आप काफी खा-पी कर काफी मोटे और बेहद आलसी हो चुके हो और इस आत्म ग्लानी में जी  रहे हो  कि आपका ये सिक्स फ्लेब(six flab) शरीर अब किसी भी काम का नहीं तो आपको ज़रा-भी शर्मिंदा और घबराने की जरुरत नहीं  आप विद्युत उर्जा निर्माण (electric power generation ) में नव भारत को सहयोग दे सकते हैं  इससे पहले सरकार मोटे और आलसी लोगो की धर पकड़ शुरू करे आज ही अपने निकटतम जिम से अधिक जानकारी प्राप्त करे !

अभी अभी:  इस बारे में टीम अन्ना का कहना है सबसे पहले ऐसी मशीने संसद भवन में लगनी चाहियें ! हमारे देश की काफी उर्जा  हमारे  नेताओं के शरीरो में निहित है जिनमे अधिकतर का बी ऍम आई  ३०  के आसपास है ! ऐसे सब उर्जावान लोग लोकउर्जापाल बिल के नीचे आने चाहियें !


~ bd


Disclaimer:
All characters appearing in this work are fictitious. Any resemblance to real experiences , real persons, living or dead, is purely coincidental. Its just a wild imagination.




4 comments:

  1. अच्छा लिखा है, भूपेंद्र!! आपका 'हू एम आई' भी अच्छा है :-)

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  2. :) yes toe mera idea tha.... ;) violation of copyright

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    1. are you sure :) and even then I published your comment here..

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