भीषण गर्मी के मौसम में बिजली की किल्लत झेल रहे देश और दिल्ली के लिए एक अच्छी खबर है
एक नयी रिसर्च से अब घर बैठे ही सस्ती बिजली निर्माण का सपना साकार हो सकेगा , जिससे सरकार पर बिजली निर्भरता अगले दस सालों में काफी कम हो जाएगी | यह संभव हो पाया है मेरठ निवासी युवा साइंटिस्ट निकोला सिंह टेस्ला , स्वास्थ, खेल, श्रम , बिजली और वैकल्पिक उर्जा मंत्रालय के मिलेजुले प्रयासों फलस्वरूप | इसी लेख में आप आगे पढ़ेंगे की यह होगा कैसे - लेकिन सबसे पहले जानिए देश में बिजली के बढते उपभोग के प्रमुख कारण :- जीवन मे ज्यादा मशीनो का उपभोग, सस्ती वाशिंग मशीन , फ्रिज , प्रैस , कूलर , हीटर , एसी, दिनरात टेलीविजन पर सीरियल्स देखना , लिफ्ट का प्रयोग करना , फेस्बुक , लैपटॉप , मोबाइल जो सभी बिजली से चलते हैं मजे की बात यह है की यही सब कारण भी इंसानी मोटापा बढने के हैं इन सभी कारणों से हेल्दी साइज़ के लोगो की आज भरमार हैं |
पहले लोग मीलो मार्निंग वाक या साईकिल चलाया करते थे वहीँ आज वो अपने मुहल्ले के पार्क तक बाईक और कार से जाते हैं ! जो मताए बहने भाई कभी घर का झाड़ू पोछा ,साफ़ सफाई , खाना बनाना , कपडे धोना , इत्यादि खुद ही किया करती थी वहीँ आज वाशिंग मशीन और वक्युम क्लीनर इस्तेमाल करने के लिए भी मेड होती हैं | जो भाई लोग कभी कबार छिप-छिपा कर घर का काम किया कर लिया करते थे वो आज इन्टरनेट ,फेसबुक, ट्विटर पर खुल कर टाइम ख़राब करते हैं | तीन मंजिला मकानों में बिना लिफ्ट के जीना किसी शर्म से कम नहीं |
अब जानिए की आखिर ये रिसर्च हैं क्या ?
MIT ( मुरैना इंस्टिट्यूट आफ टेकनोलोजी ) के निकोला सिंह टेस्ला और सरकार की एक संयुक्त शोधकर्ता टीम ने पाया की मोटे और निहायती आलसी इक्कीसवी सदी के असली उर्जा स्रोत होंगे ! इसका विचार इस युवा को उस समय किल्क हुआ जब उसने अपने मोहल्ले के ज़िम में एक मोटे [हेल्दी साइज़ ] व्यक्ति को ट्रेड मिल पर चलते हुवे देखा , अचानक बत्ती गुल हो जाने पर वो बिजली चालित ट्रेड मिल की बेल्ट रुक गयी और मोटा सोना बेल्ट पहने चलता व्यक्ति गिल्ट से भरा यूँ ही रुक गया , बस यही क्षण इस युवा वैज्ञानिक के यूरेका पल थे ! आँखों ही आँखों में युवा वैज्ञानिक ने मोटे व्यक्ति को धन्यवाद किया वहां से सीधे मुरैना की बस पकड़ कर निकल लिया और वहां जाकर अपना पेपर प्रस्तुत किया !
सबसे ज्यादा मजे की बात यह है की इसके रिसर्च के बाद मोटापा अब अभिशाप नहीं रहेगा ! यहाँ यह जानना जरुरी है की पिछली जनगणना के मुताबिक देश में मुख्यता शहरों में मोटे ( हेल्दी साइज़ ) लोगो की संख्या में लगातार वृद्धी हुई है और इसके आगे भी यूँ ही बढने के आसार हैं |
वैज्ञानिको ने लगभग पांच हजार लोगो में शोध किया और पाया गया कि लोगो में टनों चर्बी जमी है जो उर्जा का ही एक ठोस रूप है ,जिसको शोधित परिवर्तित कर मेकेनिक्ल और फिर विद्युत उर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है ! उन्होने prototype के लिए ट्रेड मिल और ज़िम की स्थिर साईकिल (stationary cycles) को चुना , इन पर थोड़े बदलाव के बाद मोटर की जगह डायनामो(dyNamo) लगा दिए गए ,अब चलाये जाने पर इनसे विद्युत उत्पादन निश्चित ही संभव था ! अनुमान से अधिक उत्पादन होने पर शोधकर्ताओं में उल्लास था , आनन् फानन में सरकार ने सभी निजी और सरकारी शहरी स्पोर्ट्स कोम्प्लेक्सेस , जिमो में इसी तरेह के बदलावों की मंजूरी दे दी है | सिर्फ बडे शहरों के मोटे लोगो से सरकार हजारो मेगा वाट बिजली उत्पादन का अनुमान लगा रही है ! मोटे लोगो द्वारा ट्रेड मिल , साइकिलिंग और जम्पिंग से बिजली उत्पादन को मानवाधिकार आयोग की हरी झंडी मिलना लगभग तय है | स्वास्थ्य और श्रम विभाग पहले ही उत्साहित हैं ! जहाँ आज चारो तरफ परमाणु सयंत्रो(Nuclear plants) का घोर विरोध हो रहा है इस प्रकार के छोटे Fatty(चर्बी) उर्जा संयंत्र इस दिशा में काफी किफायती साबित होंगे ऐसा मानना है सबका |
सरकार संसद के उमसकालीन सत्र में इसी सम्बंधित एक बिल पर विचार कर रही है जिसमे इस प्रकार उत्पादित बिजली के दाम , जिमो को उपकरणों की खरीद फरोख्त में सब्सिडी , प्रति यूनिट बिजली उत्पादन में मोटे लोगो की कमीशन , पतले हो जाने के बाद राष्ट्र सेवा मेडल , मोटे आलसी स्वयंसेवक छात्रों को स्कालरशिप , मोटे सरकारी बाबुओं और मोटी तोंद वाले पुलिस वालो को पतला होने पर प्रोमोशन गारंटी , जातिय आरक्षण व् अन्य लाभ ! अगर आप भी काफी खा-पी कर मोटे और बेहद आलसी हो चुके हो और इस आत्म ग्लानी में जी रहे हो कि आपका ये सिक्स फ्लेब शरीर अब किसी भी काम का नहीं तो आपको ज़रा-भी शर्मिंदा और घबराने की जरुरत नहीं आप विद्युत उर्जा निर्माण (electric power generation ) में नव भारत को सहयोग दे सकते हैं इससे पहले सरकार मोटे और आलसी लोगो की धर पकड़ शुरू करे आज ही अपने निकटतम जिम से अधिक जानकारी प्राप्त करे ! अभी अभी: इस बारे में आप आदमी पार्टी का कहना है सबसे पहले ऐसी मशीने संसद भवन में लगनी चाहियें |
एक नयी रिसर्च से अब घर बैठे ही सस्ती बिजली निर्माण का सपना साकार हो सकेगा , जिससे सरकार पर बिजली निर्भरता अगले दस सालों में काफी कम हो जाएगी | यह संभव हो पाया है मेरठ निवासी युवा साइंटिस्ट निकोला सिंह टेस्ला , स्वास्थ, खेल, श्रम , बिजली और वैकल्पिक उर्जा मंत्रालय के मिलेजुले प्रयासों फलस्वरूप | इसी लेख में आप आगे पढ़ेंगे की यह होगा कैसे - लेकिन सबसे पहले जानिए देश में बिजली के बढते उपभोग के प्रमुख कारण :- जीवन मे ज्यादा मशीनो का उपभोग, सस्ती वाशिंग मशीन , फ्रिज , प्रैस , कूलर , हीटर , एसी, दिनरात टेलीविजन पर सीरियल्स देखना , लिफ्ट का प्रयोग करना , फेस्बुक , लैपटॉप , मोबाइल जो सभी बिजली से चलते हैं मजे की बात यह है की यही सब कारण भी इंसानी मोटापा बढने के हैं इन सभी कारणों से हेल्दी साइज़ के लोगो की आज भरमार हैं |
पहले लोग मीलो मार्निंग वाक या साईकिल चलाया करते थे वहीँ आज वो अपने मुहल्ले के पार्क तक बाईक और कार से जाते हैं ! जो मताए बहने भाई कभी घर का झाड़ू पोछा ,साफ़ सफाई , खाना बनाना , कपडे धोना , इत्यादि खुद ही किया करती थी वहीँ आज वाशिंग मशीन और वक्युम क्लीनर इस्तेमाल करने के लिए भी मेड होती हैं | जो भाई लोग कभी कबार छिप-छिपा कर घर का काम किया कर लिया करते थे वो आज इन्टरनेट ,फेसबुक, ट्विटर पर खुल कर टाइम ख़राब करते हैं | तीन मंजिला मकानों में बिना लिफ्ट के जीना किसी शर्म से कम नहीं |
अब जानिए की आखिर ये रिसर्च हैं क्या ?
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| पहले काफी मोटा था यह युवक |
MIT ( मुरैना इंस्टिट्यूट आफ टेकनोलोजी ) के निकोला सिंह टेस्ला और सरकार की एक संयुक्त शोधकर्ता टीम ने पाया की मोटे और निहायती आलसी इक्कीसवी सदी के असली उर्जा स्रोत होंगे ! इसका विचार इस युवा को उस समय किल्क हुआ जब उसने अपने मोहल्ले के ज़िम में एक मोटे [हेल्दी साइज़ ] व्यक्ति को ट्रेड मिल पर चलते हुवे देखा , अचानक बत्ती गुल हो जाने पर वो बिजली चालित ट्रेड मिल की बेल्ट रुक गयी और मोटा सोना बेल्ट पहने चलता व्यक्ति गिल्ट से भरा यूँ ही रुक गया , बस यही क्षण इस युवा वैज्ञानिक के यूरेका पल थे ! आँखों ही आँखों में युवा वैज्ञानिक ने मोटे व्यक्ति को धन्यवाद किया वहां से सीधे मुरैना की बस पकड़ कर निकल लिया और वहां जाकर अपना पेपर प्रस्तुत किया !
सबसे ज्यादा मजे की बात यह है की इसके रिसर्च के बाद मोटापा अब अभिशाप नहीं रहेगा ! यहाँ यह जानना जरुरी है की पिछली जनगणना के मुताबिक देश में मुख्यता शहरों में मोटे ( हेल्दी साइज़ ) लोगो की संख्या में लगातार वृद्धी हुई है और इसके आगे भी यूँ ही बढने के आसार हैं |
वैज्ञानिको ने लगभग पांच हजार लोगो में शोध किया और पाया गया कि लोगो में टनों चर्बी जमी है जो उर्जा का ही एक ठोस रूप है ,जिसको शोधित परिवर्तित कर मेकेनिक्ल और फिर विद्युत उर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है ! उन्होने prototype के लिए ट्रेड मिल और ज़िम की स्थिर साईकिल (stationary cycles) को चुना , इन पर थोड़े बदलाव के बाद मोटर की जगह डायनामो(dyNamo) लगा दिए गए ,अब चलाये जाने पर इनसे विद्युत उत्पादन निश्चित ही संभव था ! अनुमान से अधिक उत्पादन होने पर शोधकर्ताओं में उल्लास था , आनन् फानन में सरकार ने सभी निजी और सरकारी शहरी स्पोर्ट्स कोम्प्लेक्सेस , जिमो में इसी तरेह के बदलावों की मंजूरी दे दी है | सिर्फ बडे शहरों के मोटे लोगो से सरकार हजारो मेगा वाट बिजली उत्पादन का अनुमान लगा रही है ! मोटे लोगो द्वारा ट्रेड मिल , साइकिलिंग और जम्पिंग से बिजली उत्पादन को मानवाधिकार आयोग की हरी झंडी मिलना लगभग तय है | स्वास्थ्य और श्रम विभाग पहले ही उत्साहित हैं ! जहाँ आज चारो तरफ परमाणु सयंत्रो(Nuclear plants) का घोर विरोध हो रहा है इस प्रकार के छोटे Fatty(चर्बी) उर्जा संयंत्र इस दिशा में काफी किफायती साबित होंगे ऐसा मानना है सबका |
सरकार संसद के उमसकालीन सत्र में इसी सम्बंधित एक बिल पर विचार कर रही है जिसमे इस प्रकार उत्पादित बिजली के दाम , जिमो को उपकरणों की खरीद फरोख्त में सब्सिडी , प्रति यूनिट बिजली उत्पादन में मोटे लोगो की कमीशन , पतले हो जाने के बाद राष्ट्र सेवा मेडल , मोटे आलसी स्वयंसेवक छात्रों को स्कालरशिप , मोटे सरकारी बाबुओं और मोटी तोंद वाले पुलिस वालो को पतला होने पर प्रोमोशन गारंटी , जातिय आरक्षण व् अन्य लाभ ! अगर आप भी काफी खा-पी कर मोटे और बेहद आलसी हो चुके हो और इस आत्म ग्लानी में जी रहे हो कि आपका ये सिक्स फ्लेब शरीर अब किसी भी काम का नहीं तो आपको ज़रा-भी शर्मिंदा और घबराने की जरुरत नहीं आप विद्युत उर्जा निर्माण (electric power generation ) में नव भारत को सहयोग दे सकते हैं इससे पहले सरकार मोटे और आलसी लोगो की धर पकड़ शुरू करे आज ही अपने निकटतम जिम से अधिक जानकारी प्राप्त करे ! अभी अभी: इस बारे में आप आदमी पार्टी का कहना है सबसे पहले ऐसी मशीने संसद भवन में लगनी चाहियें |




