Jun 10, 2014

बिजली संकट : चर्बी से बिजली बनाने का दावा

भीषण गर्मी के मौसम में बिजली की किल्लत झेल रहे देश और दिल्ली के लिए एक अच्छी खबर है
एक नयी रिसर्च से अब घर बैठे ही सस्ती बिजली निर्माण का सपना साकार हो सकेगा , जिससे सरकार पर बिजली निर्भरता अगले दस सालों में काफी कम हो जाएगी | यह संभव हो पाया है मेरठ निवासी युवा साइंटिस्ट निकोला सिंह टेस्ला , स्वास्थ, खेल, श्रम , बिजली और वैकल्पिक उर्जा मंत्रालय के मिलेजुले प्रयासों फलस्वरूप | इसी लेख में आप आगे पढ़ेंगे की यह होगा कैसे - लेकिन सबसे पहले जानिए देश में बिजली के बढते उपभोग के प्रमुख कारण :- जीवन मे ज्यादा मशीनो का उपभोग, सस्ती वाशिंग मशीन , फ्रिज , प्रैस , कूलर , हीटर , एसी, दिनरात टेलीविजन पर सीरियल्स देखना , लिफ्ट का प्रयोग करना , फेस्बुक , लैपटॉप , मोबाइल जो सभी बिजली से चलते हैं मजे की बात यह है की यही सब कारण भी इंसानी मोटापा बढने के हैं इन सभी कारणों से हेल्दी साइज़ के लोगो की आज भरमार हैं |

पहले लोग मीलो मार्निंग वाक या साईकिल चलाया करते थे वहीँ आज वो अपने मुहल्ले के पार्क तक बाईक और कार से जाते हैं ! जो मताए बहने भाई कभी घर का झाड़ू पोछा ,साफ़ सफाई , खाना बनाना , कपडे धोना , इत्यादि खुद ही किया करती थी वहीँ आज वाशिंग मशीन और वक्युम क्लीनर इस्तेमाल करने के लिए भी मेड होती हैं | जो भाई लोग कभी कबार छिप-छिपा कर घर का काम किया कर लिया करते थे वो आज इन्टरनेट ,फेसबुक, ट्विटर पर खुल कर टाइम ख़राब करते हैं | तीन मंजिला मकानों में बिना लिफ्ट के जीना किसी शर्म से कम नहीं |

अब जानिए की आखिर ये रिसर्च हैं क्या ?
पहले  काफी मोटा था यह युवक  

MIT ( मुरैना इंस्टिट्यूट आफ टेकनोलोजी ) के निकोला सिंह टेस्ला और सरकार की एक संयुक्त शोधकर्ता टीम ने पाया की मोटे और निहायती आलसी इक्कीसवी सदी के असली उर्जा स्रोत होंगे ! इसका विचार इस युवा को उस समय किल्क हुआ जब उसने अपने मोहल्ले के ज़िम में एक मोटे [हेल्दी साइज़ ] व्यक्ति को ट्रेड मिल पर चलते हुवे देखा , अचानक बत्ती गुल हो जाने पर वो बिजली चालित ट्रेड मिल की बेल्ट रुक गयी और मोटा सोना बेल्ट पहने चलता व्यक्ति गिल्ट से भरा यूँ ही रुक गया , बस यही क्षण इस युवा वैज्ञानिक के यूरेका पल थे ! आँखों ही आँखों में युवा वैज्ञानिक ने मोटे व्यक्ति को धन्यवाद किया वहां से सीधे मुरैना की बस पकड़ कर निकल लिया और वहां जाकर अपना पेपर प्रस्तुत किया !


सबसे ज्यादा मजे की बात यह है की इसके रिसर्च के बाद मोटापा अब अभिशाप नहीं रहेगा ! यहाँ यह जानना जरुरी है की पिछली जनगणना के मुताबिक देश में मुख्यता शहरों में मोटे ( हेल्दी साइज़ ) लोगो की संख्या में लगातार वृद्धी हुई है और इसके आगे भी यूँ ही बढने के आसार हैं |

वैज्ञानिको ने लगभग पांच हजार लोगो में शोध किया और पाया गया कि लोगो में टनों चर्बी जमी है जो उर्जा का ही एक ठोस रूप है ,जिसको शोधित परिवर्तित कर मेकेनिक्ल और फिर विद्युत उर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है ! उन्होने prototype के लिए ट्रेड मिल और ज़िम की स्थिर साईकिल (stationary cycles) को चुना , इन पर थोड़े बदलाव के बाद मोटर की जगह डायनामो(dyNamo) लगा दिए गए ,अब चलाये जाने पर इनसे विद्युत उत्पादन निश्चित ही संभव था ! अनुमान से अधिक उत्पादन होने पर शोधकर्ताओं में उल्लास था , आनन् फानन में सरकार ने सभी निजी और सरकारी शहरी स्पोर्ट्स कोम्प्लेक्सेस , जिमो में इसी तरेह के बदलावों की मंजूरी दे दी है | सिर्फ बडे शहरों के मोटे लोगो से सरकार हजारो मेगा वाट बिजली उत्पादन का अनुमान लगा रही है ! मोटे लोगो द्वारा ट्रेड मिल , साइकिलिंग और जम्पिंग से बिजली उत्पादन को मानवाधिकार आयोग की हरी झंडी मिलना लगभग तय है | स्वास्थ्य और श्रम विभाग पहले ही उत्साहित हैं ! जहाँ आज चारो तरफ परमाणु सयंत्रो(Nuclear plants) का घोर विरोध हो रहा है इस प्रकार के छोटे Fatty(चर्बी) उर्जा संयंत्र इस दिशा में काफी किफायती साबित होंगे ऐसा मानना है सबका |

सरकार संसद के उमसकालीन सत्र में इसी सम्बंधित एक बिल पर विचार कर रही है जिसमे इस प्रकार उत्पादित बिजली के दाम , जिमो को उपकरणों की खरीद फरोख्त में सब्सिडी , प्रति यूनिट बिजली उत्पादन में मोटे लोगो की कमीशन , पतले हो जाने के बाद राष्ट्र सेवा मेडल , मोटे आलसी स्वयंसेवक छात्रों को स्कालरशिप , मोटे सरकारी बाबुओं और मोटी तोंद वाले पुलिस वालो को पतला होने पर प्रोमोशन गारंटी , जातिय आरक्षण व् अन्य लाभ ! अगर आप भी काफी खा-पी कर मोटे और बेहद आलसी हो चुके हो और इस आत्म ग्लानी में जी रहे हो कि आपका ये सिक्स फ्लेब शरीर अब किसी भी काम का नहीं तो आपको ज़रा-भी शर्मिंदा और घबराने की जरुरत नहीं आप विद्युत उर्जा निर्माण (electric power generation ) में नव भारत को सहयोग दे सकते हैं इससे पहले सरकार मोटे और आलसी लोगो की धर पकड़ शुरू करे आज ही अपने निकटतम जिम से अधिक जानकारी प्राप्त करे ! अभी अभी: इस बारे में आप आदमी पार्टी का कहना है सबसे पहले ऐसी मशीने संसद भवन में लगनी चाहियें |

Jun 6, 2014

निर्मल बाबा के दरबार पहुंचे चुनावों में हारे नेता

हालिया सोलह मई की चुनावी सफाई ने पार्टियों  और नेताओं को झकझोर दिया है , हार के सदमे और हताशा से  टूटे नेता छुपने और चुपने के लिए मजबूर हैं | इनके लिए एक अच्छी ख़बर बस यह रही की निर्मल दरबार ने मौके को भांपते हुए दो दिन पहले एक विशेष सेक्युलर पार्टी स्पेशल समागम का आयोजन करवाया जिसमे भारी तादात में हार चुके नेता पहुंचे , सूत्रों की माने तो ये विशेष सेक्युलर समागम एकदम खचाखच भरा रहा | आप जानते होंगे की बाबाजी ने आज तक जो कृपा अपने भक्तो पर की है उसको शब्दो में कह पाना असंभव है , बाबाजी की यही कृपा हारे जन प्रतिनिधियों के लिए संजीवनी रही , प्रस्तुत है हताशाओं और कृपाओं से भरी बातचीतों के प्रमुख अंश जो हमे मिले हैं अपने ख़ुफ़िया कैमरे से :

नेता 1:
नेता : परम पुजनीय बाबाजी को मेरा Hello
निर्मल बाबा : बोलो भई कहाँ से आये हो ? और नाम क्या है तुम्हारा ?
नेता: बाबाजी अमेठी से | मेरा नाम राजकुमार शहजादा है
निर्मल बाबा: भई बोलो क्या बात है इतना घबराये हुए क्यों हो, किसी एग्जाम में फेल हुए हो ?
नेता : नहीं बाबा जी मैं पास हूँ, पर मेरे बाकी सरे टीचर और दोस्त हार गए, अब घर पे मम्मी और दीदी बोल रहे है मेरी वजह से ही सब लोग हारे हैं , बाबा जी मेरी क्या ग़लती है , जो भी काम करता हूँ उल्टा पड जाता है , कोई भी रिजल्ट मेरे फेवर में नहीं आता | सब लोग मेरी बातो पर हँसते हैं , जीजाजी भी गलियां दे रहे हैं बहुत परेशान हैं वो भी |    
निर्मल बाबा: भई ये कमल का फूल ध्यान में क्यों आ रहा है ? कहाँ देखा है तुमने आखिरी बार कमल का फूल ?
नेता जी : बाबाजी काफी सालो से नहीं देखा ,एक बार नानी जी के तालाब में देखा था इटली में |
निर्मल बाबा: भई कमल के फूलो की प्रिंट वाली शर्ट पहन कर किसी रेलवे स्टेशन पे चाय बेचो दो साल तक कृपा आनी शुरू हो जायेगी | 

नेता 2 :
नेता : बाबा जी नमस्कार, मैं तमिलनाडु से आया हूँ  मेरा नाम मोनीशंकर है
निर्मल बाबा: क्या बात है बेटा तुम घबराये हुए लग रहे हो, जैसे जमानत जब्त हुई हो तुम्हारी ?
नेता : सही कहा बाबा मैं बहुत परेशान है,सारी जिन्दगी इतने वोट नहीं मिले जितने वोटो से में इस बार हारा हूँ |
निर्मल बाबा: भई ये बताओ की तुमने चाउमीन कब खाई थी ? और भई ये तालकटोरा स्टेडियम क्यूँ आ रहा है ध्यान में  ? कब गए थे वहाँ आखिरी बार ?
नेता जी : बाबाजी काफी पहले १९६२ के आस पास केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में चीनी दोस्तों के साथ खाई थी चाउमिन बहुत मस्त बनी थी ? और तालकटोरा स्टेडियम तो अभी जनवरी में गया था |
निर्मल बाबा: बस वहीँ रुकी है कृपा , तालकटोरा स्टेडियम जाना और दो चार साल तक तुम भी चाय और चाउमीन बनाओ और बेचो कृपा आनी शुरू हो जाएगी |  

नेता 3 :
नेता : बाबा जी नमस्कार, मैं यु पी के जिला फ़रुखाबाद से आया हूँ  मेरा नाम शैलमन खुर्दिश है
निर्मल बाबा: क्या बात है बेटा तुम भी ऐसे लग रहे हो जैसे अभी हार के आये हो ?
नेता : बाबा मैं बहुत परेशान है, हमारी पूरी फेमिली हार रही है हर साल , जो भी काम करता हूँ उल्टा पड जाता है मैं आपसे दो दिन पहले से ही जुडा हूँ
निर्मल बाबा: भई ये बताओ की ये कीड़े क्यों आ रहे हैं ध्यान में ? कोई गलत काम तो नहीं किया रिसेंटली ?  ये बोलो की क्या कभी ट्राई साइकिल चलाई है ? 
नेता जी : बाबाजी काफी पहले आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में चलाई थी दोपहिया साइकिल और कीड़े तो मुझे बिलकुल पसंद नहीं है , आप ही बोलिए क्या कीड़ो पर भी मानहानि का केस करने की जरुरत है बाबा जी ?
निर्मल बाबा: बस वहीँ रुकी है कृपा , तुम चवालीस कीड़ो को भोजन कराओ और सुबह सुबह ट्राईसाइकिल चलाया करो कृपा अपने आप आने लगेगी | 

इसी तरह कई और आम आदमी नेता भी बाबाजी के पास पहुंचे हैं जिनका विडियो हमे अभी तक हाथ नहीं लगा है पर इसमें कोई शक नहीं की इन लोगो की इन बिमारियों को बाबा अपनी चमत्कारी शक्तियो से दूर कर सकते है  आप एक बार समागम के वीडियो देख लो खुद पता चल जायेगा बाबाजी जी की पावर का |

बोलो निर्मल दरबार की जय !

Image courtesy : Internet , Thanks to all cartoonists 
Disclaimer: 
This Post is a news and political satire publication, which may or may not use real names, often in semi-real or mostly fictitious ways. All news articles contained here are fiction, and presumably fake/unrelated/comic/joke/sad news.Any resemblance to the truth is purely coincidental, except for all references to politicians and/or celebrities, in which case they are based on real people, but still based almost entirely in fiction.

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