हालिया सोलह मई की चुनावी सफाई ने पार्टियों और नेताओं को झकझोर दिया है , हार के सदमे और हताशा से टूटे नेता छुपने और चुपने के लिए मजबूर हैं | इनके लिए एक अच्छी ख़बर बस यह रही की निर्मल दरबार ने मौके को भांपते हुए दो दिन पहले एक विशेष सेक्युलर पार्टी स्पेशल समागम का आयोजन करवाया जिसमे भारी तादात में हार चुके नेता पहुंचे , सूत्रों की माने तो ये विशेष सेक्युलर समागम एकदम खचाखच भरा रहा | आप जानते होंगे की बाबाजी ने आज तक जो कृपा अपने भक्तो पर की है उसको शब्दो में कह पाना असंभव है , बाबाजी की यही कृपा हारे जन प्रतिनिधियों के लिए संजीवनी रही , प्रस्तुत है हताशाओं और कृपाओं से भरी बातचीतों के प्रमुख अंश जो हमे मिले हैं अपने ख़ुफ़िया कैमरे से :
नेता : परम पुजनीय बाबाजी को मेरा Hello
निर्मल बाबा : बोलो भई कहाँ से आये हो ? और नाम क्या है तुम्हारा ?
नेता: बाबाजी अमेठी से | मेरा नाम राजकुमार शहजादा है
निर्मल बाबा: भई बोलो क्या बात है इतना घबराये हुए क्यों हो, किसी एग्जाम में फेल हुए हो ?
नेता : नहीं बाबा जी मैं पास हूँ, पर मेरे बाकी सरे टीचर और दोस्त हार गए, अब घर पे मम्मी और दीदी बोल रहे है मेरी वजह से ही सब लोग हारे हैं , बाबा जी मेरी क्या ग़लती है , जो भी काम करता हूँ उल्टा पड जाता है , कोई भी रिजल्ट मेरे फेवर में नहीं आता | सब लोग मेरी बातो पर हँसते हैं , जीजाजी भी गलियां दे रहे हैं बहुत परेशान हैं वो भी |
निर्मल बाबा: भई ये कमल का फूल ध्यान में क्यों आ रहा है ? कहाँ देखा है तुमने आखिरी बार कमल का फूल ?
नेता जी : बाबाजी काफी सालो से नहीं देखा ,एक बार नानी जी के तालाब में देखा था इटली में |
निर्मल बाबा: भई कमल के फूलो की प्रिंट वाली शर्ट पहन कर किसी रेलवे स्टेशन पे चाय बेचो दो साल तक कृपा आनी शुरू हो जायेगी |
नेता : बाबा जी नमस्कार, मैं तमिलनाडु से आया हूँ मेरा नाम मोनीशंकर है
निर्मल बाबा: क्या बात है बेटा तुम घबराये हुए लग रहे हो, जैसे जमानत जब्त हुई हो तुम्हारी ?
नेता : सही कहा बाबा मैं बहुत परेशान है,सारी जिन्दगी इतने वोट नहीं मिले जितने वोटो से में इस बार हारा हूँ |
निर्मल बाबा: भई ये बताओ की तुमने चाउमीन कब खाई थी ? और भई ये तालकटोरा स्टेडियम क्यूँ आ रहा है ध्यान में ? कब गए थे वहाँ आखिरी बार ?
नेता जी : बाबाजी काफी पहले १९६२ के आस पास केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में चीनी दोस्तों के साथ खाई थी चाउमिन बहुत मस्त बनी थी ? और तालकटोरा स्टेडियम तो अभी जनवरी में गया था |
निर्मल बाबा: बस वहीँ रुकी है कृपा , तालकटोरा स्टेडियम जाना और दो चार साल तक तुम भी चाय और चाउमीन बनाओ और बेचो कृपा आनी शुरू हो जाएगी |
नेता : बाबा जी नमस्कार, मैं यु पी के जिला फ़रुखाबाद से आया हूँ मेरा नाम शैलमन खुर्दिश है
निर्मल बाबा: क्या बात है बेटा तुम भी ऐसे लग रहे हो जैसे अभी हार के आये हो ?
नेता : बाबा मैं बहुत परेशान है, हमारी पूरी फेमिली हार रही है हर साल , जो भी काम करता हूँ उल्टा पड जाता है मैं आपसे दो दिन पहले से ही जुडा हूँ
नेता जी : बाबाजी काफी पहले आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में चलाई थी दोपहिया साइकिल और कीड़े तो मुझे बिलकुल पसंद नहीं है , आप ही बोलिए क्या कीड़ो पर भी मानहानि का केस करने की जरुरत है बाबा जी ?
निर्मल बाबा: बस वहीँ रुकी है कृपा , तुम चवालीस कीड़ो को भोजन कराओ और सुबह सुबह ट्राईसाइकिल चलाया करो कृपा अपने आप आने लगेगी |
इसी तरह कई और आम आदमी नेता भी बाबाजी के पास पहुंचे हैं जिनका विडियो हमे अभी तक हाथ नहीं लगा है पर इसमें कोई शक नहीं की इन लोगो की इन बिमारियों को बाबा अपनी चमत्कारी शक्तियो से दूर कर सकते है आप एक बार समागम के वीडियो देख लो खुद पता चल जायेगा बाबाजी जी की पावर का |
बोलो निर्मल दरबार की जय !
Image courtesy : Internet , Thanks to all cartoonists
Disclaimer:
This Post is a news and political satire publication, which may or may not use real names, often in semi-real or mostly fictitious ways. All news articles contained here are fiction, and presumably fake/unrelated/comic/joke/sad news.Any resemblance to the truth is purely coincidental, except for all references to politicians and/or celebrities, in which case they are based on real people, but still based almost entirely in fiction.
Image courtesy : Internet , Thanks to all cartoonists
Disclaimer:
This Post is a news and political satire publication, which may or may not use real names, often in semi-real or mostly fictitious ways. All news articles contained here are fiction, and presumably fake/unrelated/comic/joke/sad news.Any resemblance to the truth is purely coincidental, except for all references to politicians and/or celebrities, in which case they are based on real people, but still based almost entirely in fiction.



